दादाजी जिस भी चीज़ को छूते हैं, वह दुगनी बड़ी हो जाती है! उन्होंने सेब छुआ, वह तरबूज जितना बड़ा हो गया। गरीब का घर छुआ, वह बड़ा मकान बन गया। पूरा गाँव खुश था। लेकिन एक दिन गलती से उनका हाथ एक कुत्ते पर लगा, और वह दानव जितना बड़ा हो गया! अगले दिन नाले को छुआ, तो वह नदी जितना बड़ा हो गया और पूरे गाँव में पानी भर गया। इन दिक्कतों से परेशान होकर गाँव वालों ने दादाजी को गाँव से बाहर निकाल दिया। कुछ दिन बाद गाँव में सूखा पड़ गया। एक भारी चट्टान ने नदी का रास्ता रोक दिया था। थक-हारकर गाँव वाले रोते हुए दादाजी के पास पहुंचे। दयालु दादाजी गाँव आए और उन्होंने नदी के बांध को छू दिया। बांध दुगना बड़ा हो गया और पूरे गाँव में पानी पहुंच गया। सब ठीक हो गया, गाँव वाले जश्न मनाने लगे। लेकिन तभी दादाजी सिर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे। मुखिया ने पूछा, "दादाजी! अब क्यों रो रहे हो?" दादाजी ने रोते हुए जेब से मोबाइल निकाला और बोले— "मैंने छूकर मोबाइल तो दुगना बड़ा कर लिया, लेकिन मेरे इस चैनल को देखो! कोई इसे लाइक और सब्सक्राइब ही नहीं करता!" यह सुन पूरे गाँव ने तुरंत अपना फोन निकाल कर सब्सक्राइब कर दिया। तो दोस्तों, आप भी दादाजी को मत रुलाओ, जल्दी से वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब कर दो!